Islamic NATO: यह नया गठबंधन तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के हितों को दर्शाता है। ये दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में साथ काम कर रहे हैं। तुर्की इसे अपनी सुरक्षा मजबूत करने का तरीका मानता है। अमेरिका की NATO के प्रति निष्ठा पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर ट्रंप के समय। फिर भी अमेरिका तीनों देशों से करीबी सैन्य संबंध रखता है
‘इस्लामिक NATO’ बनाने की तैयारी, तुर्की के हथियार, सऊदी अरब का पैसा और पाकिस्तान का न्यूक्लियर और मिसाइल!